Monika garg

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लेखनी प्रतियोगिता -12-Jun-2022# सौतेली मां ने ने

बेटा ।तुम मेरे पास आओ। मुझे तुमसे कुछ कहना है ।"संगीता ने ग्यारह साल के कन्नू को अपने पास बुलाया।कल रात घर मे बहुत बड़ा क्लेश हो गया था जिस कारण संगीता जो सालों से जुल्म सहन कर रही थी सास और पति का उसका सब्र का बांध टूट गया और वह रसोई घर में गयी और गैस के सिलेंडर का पाइप निकाल कर अपने मुंह की तरफ कर लिया और दियासलाई दिखा दी।आग रसोई घर मे चारों ओर फैल गयी थी संगीता के कपड़ों ने आग पकड़ ली थी।वो तो सुरेश ने आकर फटाफट सिलेंडर की नोब बंद करके संगीता पर कंबल डाल दिया।आग तो बुझ गयी पर संगीता पैसठ प्रतिशत जल चुकी थी।आज डाक्टर ने भी अस्पताल मे जवाब दे दिया था कि ये जितनी देर तड़पें गी तड़पें गी पर इन्हें बचाना असंभव है।जब संगीता को पता चला तो उसने अपने ग्यारह साल के बेटे कन्नू को अपने पास बुलाया और बोली,"बेटा मै भगवान के पास कभी भी जा सकती हूं ।तुम अपने छोटे भाई का ध्यान रखना।"
कन्नू सुबक रहा था बस बार बार यही कह रहा था,"मां तुम कही नही जाओगी मुझे और तन्नू को पढ़ायेगा कौन हमारा ध्यान कौन रखेगा।मै भगवान से बात नही करूंगा अगर वो तुम्हे ले गये तो।"
इतने मे कन्नू की सिसकियां बंध गयी और वह जोर जोर से रोने लगा।
सुरेश उसे आईसीयू से बाहर ले आया।संगीता और कन्नू एक दूसरे को अपलक देखते रहे जब तक दोनों एक दूसरे की आंखों से ओझल नही हो गये।बाहर आकर कन्नू जोर जोर से रोने लगा ,"मेरी मां को कुछ नही होगा अगर भगवान ले गये तो मै भगवान से लड़ाई कर लूंगा।
पर जाने वाले को तो जाना ही होता है उसे कौन रोक सका है।शाम को संगीता का शूगर हाई हो गया और दिमाग पर शूगर के अटैक की वजह से उसके प्राण पखेरू उड़ गये।अपने पीछे दो बिलबिलाते बच्चे छोड़ गयी संगीता।
संगीता के पड़ोस मे ही सोनिया नाम की औरत रहती थी वो संगीता की सबसे अच्छी सहेली थी । तलाकशुदा थी और अपने मायके मे रहती थी।अकसर दोनों सहेलियां आमने सामने खड़ी होकर दरवाजे पर अपना दुखड़ा सुनाती रहती थी सोनिया अपने पति के ज़ुल्म और भाई भाभी की नाइंसाफी बताती रहती थी तो संगीता पति और सास के द्वारा किए अत्याचार। सुरेश वैसे एक आदर्श पति था लेकिन जब मां की सीख मे आ जाता था तो अच्छे बुरे का कोई भान नहीं रहता था । दोनों मिलकर संगीता का जीना दुश्वार कर देते थे। कन्नू सब देखता था।दादी को सोनिया आंटी पहले से ही पसंद थी वो तो उसकी मां उसके पापा की पसंद थी तो मजबूरी में दादी ने मां के साथ पापा की शादी करा दी थी।
अब संगीता के जाने के बाद सोनिया का उस घर मे आना जाना बढ़ गया था क्योंकि कन्नू की दादी बूढ़ी हो चली थी ज्यादा काम नही बनता था और वो अपनी प्यारी सहेली के बच्चों को यूं रोटी के लिए तरसता नही देख सकती थी।वो जी जान लगा कर सेवा करती थी सब की। दोनों घरों ने सुरेश और सोनिया का रिश्ता आपस मे जोड़ने की बात पक्की कर ली आपसी सहमति से।
संगीता की छमाही बाद सुरेश और सोनिया का विवाह बड़े ही सादे समारोह मे सम्पन्न हुआ।नयी बहू घर आ गयी नयी तो क्या थी वो उन लोगों के लिए बस अब उसे बहू नाम का तमग़ा मिल गया था। कन्नू ने किताबों मे और दादी के मुख से बहुत बार सौतेली मां का जिक्र सुना था।तब से उसके मन में एक भयानक तस्वीर बन गयी थी सौतेली मां की ।उसे लगता था वो उसे और उसके भाई को तरह तरह से टार्चर करेगी। वो पहलै ही दिन से सोनिया पर हावी होने की कोशिश मे लगा रहता।अगर सोनिया ये कहती,"बेटा कन्नू खाना खा लो ।"तो वो कहता"खा लूंगा क्यों सिर पर चढ़ रही हो।तुम मेरी मां नही हो मेरे पिताजी की पत्नी हो ।हम पे रौब केवल हमारी मां ही झाड़ती थी।
एक दिन तो कन्नू ने हद ही कर दी। कन्नू की जेब से एक सिगरेट का पैकेट मिला सोनिया को उसके कपड़े धोते हुए।जब वो स्कूल से घर आया  तो सोनिया ने गुस्से मे उससे पूछा,"क्या बात है कन्नू अब तुम सिगरेट भी पीने लगे हो।" यह कह कर सोनिया ने जैसे ही कन्नू का हाथ पकड़ा उसे वही बातें याद आने लगी "सौतेली मां टार्चर करतीं है ।उसने सोनिया के हाथ को जोर से मरोड़ कर उसे धक्का दे दिया और बोला,"मेरे पापा की पत्नी हो वही बन कर रहो।हमारी मां बनने की कोशिश की तो मेरे से बुरा कोई नही होगा।" यह कह कर वह बाहर भाग गया।उस दिन सोनिया खूब रोई।पर उसनू सुरेश के आगे एक शब्द भी नही बोला। कन्नू मन ही मन सोचने लगा शायद ये मुझ से डर गयी है तभी पिताजी को कुछ नही बोली। कन्नू की बदतमीजियां बदस्तूर जारी थी।
सोनिया बच्चा समझ कर हर बार माफ कर देती।एक दिन दोपहर का समय था । सुरेश काम से शहर से बाहर गया था । अन्नू दादी के पास सो रहा था और कन्नू का कही पता नही था वो कहां है।तभी पड़ोस का एक लड़का भागा भागा आया और बोला,"आंटी कन्नू सड़क पार करके आईसक्रीम वाले से आईसक्रीम लेने जा रहा था एक कार ने उसे उड़ा दिया बहुत खून बह रहा है।"
सोनिया की तो जैसे जान ही सूख गयी ।अगर कन्नू को कुछ हो गया तो वो अपनी मरी हुई सहेली को क्या मुंह दिखाएगी मरने के बाद ।वह सास को बिना बताए आगे की कुंडी लगा कर नंगे पांव ही भाग ली उसने देखा कन्नू के सिर से बहुत खून बह रहा था वह कभी होश मे आ रहा था कभी बेहोशी छा रही थी उस पर। सोनिया ने फटाफट आटो किया और उसे गोद मे उठा कर अस्पताल चल पड़ी। अस्पताल पहुंच कर वह सीधा डाक्टर के ओ पीडी मे पहुंच गयी और जोर जोर से रोने लगी ,"डाक्टर साहब मेरे बच्चे को बचा लो बहुत ही खून बह गया है।मै आप के हाथ जोड़ती हूं पैर पडती हूं।"बाहर स्ट्रेचर पर लेटा कन्नू सोनिया का यू बिलखना देख रहा था ।वह तभी बेहोश हो गया।
जब उसे होश आया तो रात हो चुकी थी वो अस्पताल के कमरे मे बैड पर लेटा था।तभी नर्स आयी और उसे होश मे आया देखकर बोली,"तुम बहुत लक्की हो जो तुम्हें ऐसी मां मिली है आज अपना खून देकर उसने तुम्हें बचाया है सही है मां जब पैदा करती है तब भी खून से सींचती है।और जब बच्चे को जरूरत हो तब भी खून से सींचती है।"पास मे खड़ी नर्स हां मे हां मिला रही थी।आछ कन्नू अपने आप से नजरे नही मिला रहा था उसने धीरे से नर्स से कहा,"मां को बुला दो।"
नर्स ने बाहर जाकर सोनिया को अंदर भेज दिया सोनिया दरवाजे पर ही खड़ी थी कि तभी कन्नू ने बाहें फैला कर कहा,"मां मेरे पास आ जाओ।"
सोनिया ने दौडकर कननू को अपने सीने से लगा लिया । दोनों की आंखों से आंसू बह रहे थे कन्नू को मां मिल गयी थी तो सोनिया को अपना बेटा।

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10 Comments

नंदिता राय

14-Jun-2022 06:51 PM

बेहतरीन

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Shnaya

14-Jun-2022 12:06 PM

शानदार

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Kaushalya Rani

13-Jun-2022 04:25 PM

Lovely👌

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